भारत के घरेलू स्टील बाजार में एक बार फिर कीमतों को लेकर हलचल तेज हो गई है। हाल के दिनों में प्राइमरी स्टील मिलों ने BF रूट रिबार की कीमतों में लगभग ₹700 से ₹1,000 प्रति टन की बढ़ोतरी की है। इस फैसले के बाद न केवल प्राइमरी सेगमेंट बल्कि पूरा सेकेंडरी स्टील बाजार भी धीरे-धीरे मजबूती की ओर बढ़ता नजर आ रहा है।
उद्योग से जुड़े जानकारों के अनुसार, यह कीमत बढ़ोतरी किसी एक कारण का नतीजा नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई फैक्टर्स एक साथ काम कर रहे हैं। बीते कुछ समय से प्राइमरी स्टील मिलों पर लागत का दबाव बना हुआ था। ऊर्जा लागत, लॉजिस्टिक्स खर्च और ऑपरेशनल लागत में स्थिरता के बावजूद, मिलों के मार्जिन सीमित हो गए थे। ऐसे में, बाजार में मांग में हल्का सुधार दिखते ही मिलों ने कीमतों में संशोधन का फैसला लिया।
प्राइमरी मिलों की कीमत बढ़ोतरी का बाजार पर असर
जैसे ही प्राइमरी मिलों ने रिबार के दाम बढ़ाए, इसका असर तुरंत ट्रेड लेवल और डिस्ट्रीब्यूशन चैनल पर दिखा। प्राइमरी रिबार की कीमतें बढ़ने का मतलब यह है कि सेकेंडरी उत्पादों के लिए भी एक नया प्राइस फ्लोर बन जाता है। यही कारण है कि प्राइमरी मिलों के फैसले के बाद सेकेंडरी बाजार में भारी गिरावट की संभावना फिलहाल कम नजर आ रही है।
ट्रेडर्स का कहना है कि पहले जहां बाजार में डिस्काउंट को लेकर दबाव था, अब वहां डिस्काउंट सीमित होते जा रहे हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि बाजार धीरे-धीरे कीमतों को स्वीकार कर रहा है।
बिलेट बाजार को मिला मजबूत सपोर्ट
प्राइमरी रिबार की कीमत बढ़ोतरी का सबसे सीधा असर बिलेट बाजार पर पड़ा है। बिलेट सेकेंडरी स्टील इंडस्ट्री का प्रमुख कच्चा माल है और इसकी कीमतों में बदलाव पूरे सेकेंडरी सेगमेंट की दिशा तय करता है। हालिया घटनाक्रम के बाद प्रमुख सेकेंडरी स्टील हब्स में बिलेट की कीमतों को सपोर्ट मिला है।
रोलिंग मिलों के लिए बिलेट की लागत बढ़ने से तैयार माल जैसे TMT, स्ट्रक्चर, एंगल, चैनल, वायर रॉड और पाइप की लागत भी प्रभावित होती है। ऐसे में रोलिंग मिलें अब पहले की तुलना में ज्यादा सतर्क होकर बिक्री कर रही हैं और आक्रामक प्राइस कट से बच रही हैं।
सेकेंडरी बाजार में मांग की स्थिति
हालांकि, यह कहना अभी जल्दबाज़ी होगी कि सेकेंडरी बाजार में मांग बहुत तेज हो गई है। बाजार में खरीदारी अब भी जरूरत आधारित बनी हुई है। रियल एस्टेट और छोटे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से जुड़ी मांग में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिल रहा है, लेकिन बड़े पैमाने पर स्टॉक बिल्डिंग फिलहाल सीमित है।
इसके बावजूद, बाजार की धारणा पहले के मुकाबले काफी बेहतर हुई है। खरीदार अब यह मानने लगे हैं कि प्राइमरी मिलों की कीमत बढ़ोतरी के बाद बाजार में बहुत ज्यादा गिरावट की गुंजाइश नहीं बची है।
सेकेंडरी उत्पादों पर असर
बिलेट की मजबूती का असर अब धीरे-धीरे सेकेंडरी तैयार उत्पादों में भी दिखाई देने लगा है। कई क्षेत्रों में TMT और स्ट्रक्चरल प्रोडक्ट्स के भाव स्थिर से हल्के मजबूत हुए हैं। रोलिंग मिलों का मानना है कि अगर बिलेट की कीमतें इसी स्तर पर बनी रहती हैं, तो आने वाले दिनों में सेकेंडरी उत्पादों में भी आंशिक कीमत संशोधन देखने को मिल सकता है।
आगे बाजार की दिशा क्या हो सकती है
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में स्टील बाजार की दिशा तीन प्रमुख फैक्टर्स पर निर्भर करेगी:
-
प्राइमरी मिलों की अगली कीमत रणनीति
-
बिलेट की उपलब्धता और लागत
-
निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी वास्तविक मांग
यदि मांग धीरे-धीरे सुधरती रही और बिलेट बाजार स्थिर बना रहा, तो सेकेंडरी स्टील बाजार में मौजूदा मजबूती कुछ समय तक बनी रह सकती है। हालांकि, अचानक तेज तेजी की उम्मीद फिलहाल कम है।
कुल मिलाकर, प्राइमरी स्टील मिलों द्वारा BF रूट रिबार की कीमतों में ₹700–1,000 प्रति टन की बढ़ोतरी ने घरेलू स्टील बाजार को एक स्पष्ट संकेत दिया है। इस फैसले से बिलेट और सेकेंडरी स्टील उत्पादों को मजबूत सपोर्ट मिला है और बाजार में गिरावट की आशंका फिलहाल सीमित हो गई है। आने वाले समय में मांग की निरंतरता और लागत की स्थिति यह तय करेगी कि यह मजबूती कितनी टिकाऊ साबित होती है।
